KP sub lord को समझें: 249 विभाजन, star lord और sub lord का नियम, और cusp sub lord कैसे पढ़ें
KP का सबसे छोटा विभाजन, और वही अंतिम फैसला देता है
KP sub lord वह विचार है जो कृष्णमूर्ति पद्धति को भारतीय ज्योतिष की बाकी शाखाओं से अलग करता है। पारंपरिक ज्योतिष किसी ग्रह को उसकी राशि और उसके नक्षत्र से पढ़ता है। के एस कृष्णमूर्ति एक कदम आगे गए: उन्होंने हर नक्षत्र को नौ असमान भागों में बांटा और हर भाग को एक स्वामी दिया, जिसे sub lord कहते हैं। KP में यही sub lord तय करता है कि कुंडली में जिस बात का वादा है, वह असल में घटित होगी या नहीं। इस लेख में हम समझेंगे कि sub lord क्या है, ये 249 क्यों हैं, ग्रह, star lord और sub lord का नियम क्या है, cusp sub lord और ग्रह के sub lord में क्या अंतर है, और एक उदाहरण से एक cusp sub lord को पढ़ना सीखेंगे। पढ़ते हुए आप किसी भी अंश का sub lord हमारे मुफ्त KP sub lord कैलकुलेटर पर देख सकते हैं।
KP ज्योतिष में sub lord क्या है?
KP ज्योतिष में sub lord क्या है, यह समझने के लिए उन परतों से शुरू करें जिनसे हर KP चार्ट बनता है। 360 अंश के राशिचक्र को 30-30 अंश की 12 राशियों में बांटा जाता है, और हर राशि का एक राशि स्वामी होता है। इसी राशिचक्र को 13 अंश 20 कला के 27 नक्षत्रों में भी बांटा जाता है, और हर नक्षत्र का एक स्वामी होता है, जिसे KP में star lord कहते हैं। यह क्रम विंशोत्तरी दशा के अनुसार चलता है। ये दोनों परतें पारंपरिक वैदिक ज्योतिष से आती हैं।
KP इसमें तीसरी परत जोड़ता है। हर नक्षत्र को नौ छोटे भागों में बांटा जाता है, जिन्हें sub कहते हैं, और हर sub का स्वामी नौ ग्रहों में से कोई एक होता है। यही स्वामी sub lord है। इसलिए KP चार्ट का हर सटीक अंश, चाहे वह किसी ग्रह की स्थिति हो या किसी भाव का आरंभ बिंदु, तीन स्वामी रखता है: राशि स्वामी, star lord और sub lord। कई KP चार्ट sub-sub lord भी दिखाते हैं, लेकिन KP के मूल नियम sub lord के स्तर पर ही लिखे गए थे।
राशि स्वामी
30 अंश की राशि का स्वामी। राशिचक्र में 12 विभाजन।
Star lord
13 अंश 20 कला के नक्षत्र का स्वामी। राशिचक्र में 27 विभाजन।
Sub lord
नक्षत्र के नौ असमान भागों में से एक का स्वामी। राशिचक्र में 249 विभाजन।
राशिचक्र 249 sub lords में कैसे बंटता है
Sub बराबर नहीं होते। कृष्णमूर्ति जी ने हर sub का आकार 120 वर्ष की विंशोत्तरी दशा में उस ग्रह की अवधि के अनुपात में रखा: केतु 7 वर्ष, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्रमा 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17। एक नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है, यानी 800 कला। हर ग्रह के sub को इन 800 कला में से उतना हिस्सा मिलता है, जितना 120 में उसकी दशा के वर्षों का अनुपात है।
हर नक्षत्र का पहला sub उसी नक्षत्र के star lord का होता है, और बाकी आठ विंशोत्तरी क्रम में आगे चलते हैं। उदाहरण के लिए, अश्विनी का स्वामी केतु है, इसलिए इसके sub का क्रम है: केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्रमा, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। हर नक्षत्र में sub की चौड़ाई एक जैसी रहती है, केवल शुरुआती ग्रह बदलता है:
| Sub lord | दशा वर्ष | Sub की चौड़ाई |
|---|---|---|
| केतु | 7 | 0°46'40" |
| शुक्र | 20 | 2°13'20" (सबसे चौड़ा) |
| सूर्य | 6 | 0°40'00" (सबसे संकरा) |
| चंद्रमा | 10 | 1°06'40" |
| मंगल | 7 | 0°46'40" |
| राहु | 18 | 2°00'00" |
| गुरु | 16 | 1°46'40" |
| शनि | 19 | 2°06'40" |
| बुध | 17 | 1°53'20" |
27 नक्षत्रों में नौ-नौ sub होने से कुल 243 बनते हैं। तो फिर हर KP संदर्भ 249 की बात क्यों करता है? क्योंकि नक्षत्र और sub की सीमाएं हमेशा 30 अंश की राशि सीमाओं से मेल नहीं खातीं। छह जगहों पर एक ही sub एक राशि में शुरू होकर अगली राशि में खत्म होता है। उस सीमा पर राशि स्वामी बदल जाता है, जबकि star lord और sub lord वही रहते हैं, इसलिए ऐसे हर sub को दो बार गिना जाता है, हर राशि के लिए एक बार। इससे छह प्रविष्टियां बढ़ती हैं और कुल संख्या 249 हो जाती है। KP प्रश्न ज्योतिष में भी 1 से 249 तक की यही संख्याएं प्रयोग होती हैं। इन सभी को शुरुआती और अंतिम अंश के साथ आप हमारी 249 sub lords तालिका में देख सकते हैं।
Star lord और sub lord: KP का तीन स्तर वाला नियम
KP sub lord सिद्धांत का मूल तीन स्तरों के बीच काम का एक सीधा बंटवारा है। KP के शिक्षक इसे मोटे तौर पर ऐसे समझाते हैं:
ग्रह स्रोत है
ग्रह वह माध्यम है जो फल देता है। अकेले वह यह बताता है कि कौन काम कर रहा है, लेकिन यह नहीं कि जीवन के कौन से विषय सामने आएंगे।
Star lord फल की प्रकृति बताता है
KP मानता है कि ग्रह उन भावों का फल देता है जिन्हें उसका star lord, यानी जिस नक्षत्र में वह बैठा है उसका स्वामी, दर्शाता है। इसलिए star lord तय करता है कि ग्रह किस तरह का विषय लाएगा: धन, विवाह, काम, स्वास्थ्य आदि।
Sub lord तय करता है कि फल मिलेगा या नहीं
Sub lord तय करता है कि वह विषय असल में साकार होगा या नहीं, और परिणाम व्यक्ति के लिए अनुकूल होगा या प्रतिकूल। यह star lord के वादे पर द्वारपाल की तरह काम करता है।
इसी कारण कोई ग्रह राशि से बलवान और भाव से अच्छी जगह बैठा होने पर भी फल नहीं दे पाता, जब उसका sub lord उस विषय के विरोधी भावों को दर्शाता है। यही वजह है कि star lord और sub lord को साथ पढ़ा जाता है: star lord बताता है कि थाली में क्या है, और sub lord बताता है कि वह परोसा जाएगा या नहीं।
जहां KP ज्योतिषियों में मतभेद है
तीन स्तर वाला यह सूत्र मानक KP है। इसे कितनी दूर तक ले जाना है, वहां अलग-अलग परंपराएं अलग राह लेती हैं, और यह साफ कहना ठीक है:
- Sub lord को कैसे परखें। कई ज्योतिषी sub lord को मुख्य रूप से उसके अपने star lord द्वारा दर्शाए भावों से परखते हैं। कुछ sub lord की अपनी स्थिति और स्वामित्व को, या आगे उसके sub lord को अधिक महत्व देते हैं।
- कितने स्तर लें। कुछ ज्योतिषी sub lord पर रुक जाते हैं। बाद की विधियां sub-sub lord जोड़ती हैं, या कई चरणों वाली ऐसी पद्धतियां अपनाती हैं जो कृष्णमूर्ति जी की मूल पुस्तकों से आगे जाती हैं।
- कौन से भाव नकारात्मक माने जाएं। यह नियम व्यापक रूप से माना जाता है कि किसी भाव से 12वां भाव उसके विरुद्ध काम करता है, लेकिन अलग-अलग प्रश्नों के लिए भावों की सूची शिक्षकों में थोड़ी अलग होती है।
Cusp sub lord बनाम ग्रह के sub lord
KP चार्ट में दो तरह के sub lord होते हैं, और दोनों अलग सवालों के जवाब देते हैं।
Cusp sub lord उस सटीक अंश का sub lord है जहां कोई भाव शुरू होता है। KP असमान भाव लेता है, इसलिए 12 में से हर cusp अपने अलग अंश पर होता है, और हर एक का अपना राशि स्वामी, star lord और sub lord होता है। किसी भाव के cusp sub lord को उस भाव के वादे का न्यायाधीश माना जाता है। सातवें cusp का sub lord विवाह के बारे में बताता है, दसवें का करियर के बारे में, और पांचवें का संतान व पढ़ाई के बारे में। अगर cusp sub lord उस विषय के सहायक भावों को दर्शाता है, तो कुंडली में वह विषय वादा किया हुआ माना जाता है। अगर वह विरोधी भावों को दर्शाता है, तो KP उसे देरी, इनकार या कठिनाई के रूप में पढ़ता है।
ग्रह का sub lord उस अंश का sub lord है जिस पर कोई ग्रह बैठा है। इससे यह तय करने में मदद मिलती है कि जब उस ग्रह की दशा, भुक्ति या अंतर चलेगा, तो क्या वह ग्रह अपने star lord के बताए फल सच में देगा। अच्छे नक्षत्र में पर प्रतिकूल sub में बैठा ग्रह अपनी अवधि में अपेक्षित फल बहुत कम दे सकता है।
Cusp sub lord का सवाल: क्या वादा है?
भाव के आरंभ अंश से पढ़ा जाता है। यह तय करता है कि कुंडली में उस भाव के विषयों का वादा है भी या नहीं।
ग्रह के sub lord का सवाल: क्या यह अवधि फल देगी?
ग्रह के अंश से पढ़ा जाता है। यह तय करता है कि उस ग्रह की अवधि चलने पर वह अपने star lord के फल दे पाएगा या नहीं।
व्यवहार में KP ज्योतिषी पहले वादे के लिए cusp sub lord देखते हैं, फिर संबंधित भावों को दर्शाने वाले ग्रहों की सूची बनाते हैं, और फिर चल रही दशा और ruling planets से तय करते हैं कि वादा कब पूरा हो सकता है। पूरा KP चार्ट हर cusp और ग्रह का राशि स्वामी, star lord और sub lord एक साथ दिखाता है, और KP significators कैलकुलेटर बताता है कि कौन सा ग्रह किन भावों को दर्शाता है।
उदाहरण: एक cusp sub lord को पढ़ना
यह एक सामान्य उदाहरण है, जो केवल विधि समझाने के लिए बनाया गया है। यह किसी व्यक्ति की कुंडली नहीं है, और असली रीडिंग में एक cusp से कहीं ज़्यादा देखा जाता है। सवाल वही पुराना है: क्या विवाह का वादा है? KP में विवाह के सहायक भाव आम तौर पर 2 (परिवार में नया सदस्य), 7 (जीवनसाथी और साझेदारी) और 11 (इच्छा पूर्ति) माने जाते हैं। भाव 1, 6 और 10, जो क्रमशः 2, 7 और 11 से 12वें हैं, इसके विरुद्ध माने जाते हैं।
सातवें cusp का अंश देखें
मान लीजिए सातवां cusp तुला के 9°30' पर है। राशि स्वामी शुक्र है, क्योंकि तुला का स्वामी शुक्र है।
Star lord देखें
स्वाति नक्षत्र तुला के 6°40' से 20°00' तक फैला है, और इसका स्वामी राहु है। इसलिए सातवें cusp का star lord राहु है।
Sub lord देखें
स्वाति के भीतर राहु का sub 6°40' से 8°40' तक है, और गुरु का sub 8°40' से 10°26'40" तक। 9°30' वाला cusp गुरु के sub में आता है। इसलिए सातवें cusp का sub lord गुरु है।
देखें कि sub lord क्या दर्शाता है
अब उदाहरण के लिए मान लें कि गुरु शुक्र के नक्षत्र में बैठा है, और शुक्र ग्यारहवें भाव में है तथा दूसरे और सातवें cusp की राशियों का स्वामी है। तब अपने star lord के माध्यम से गुरु भाव 2, 7 और 11 को दर्शाता है।
वादे पर निर्णय दें
जो सातवें cusp का sub lord 2, 7 और 11 को दर्शाए, उसे KP में विवाह का वादा माना जाता है। अगर यही गुरु किसी ऐसे ग्रह के नक्षत्र में होता जो 1, 6 और 10 को दर्शाता है, तो रीडिंग देरी, इनकार या कठिनाई की ओर झुकती।
फिर समय निर्धारण करें
वादा अभी यह नहीं बताता कि कब। अब ज्योतिषी 2, 7 और 11 के significators की सूची बनाता है, देखता है कि इनमें से कौन दशा, भुक्ति और अंतर के स्वामी के रूप में चल रहे हैं, और ruling planets से पुष्टि करता है। यह sub lord के निर्णय से अलग चरण है।
ध्यान दें कि तीसरा चरण कितना संकरा था। अगर cusp 10°26'40" से ज़रा आगे होता, तो sub lord शनि बन जाता, और निर्णय पूरी तरह अलग संकेतों पर टिका होता।
Sub lord के लिए सटीक जन्म समय क्यों ज़रूरी है
ग्रह धीरे चलते हैं, इसलिए जन्म समय की छोटी गलती से किसी ग्रह का sub lord शायद ही बदलता है। Cusps की बात अलग है। लग्न लगभग एक दिन में पूरे 360 अंश घूम जाता है, यानी औसतन हर चार मिनट में करीब एक अंश, और बाकी सभी cusps उसके साथ चलते हैं। असल गति उदय होती राशि और जन्म स्थान के अक्षांश के अनुसार बदलती है, इसलिए इस आंकड़े को औसत ही मानें।
अब इस गति की तुलना sub की चौड़ाई से करें। सबसे संकरा sub, सूर्य का, केवल 40 कला का है, जिसे लग्न औसतन तीन मिनट से कम समय में पार कर लेता है। सबसे चौड़ा, 2°13'20" वाला शुक्र का sub भी लगभग नौ मिनट में निकल जाता है। इसलिए कुछ मिनट की गलती वाला जन्म समय किसी cusp को अगले sub में ले जा सकता है, उसका sub lord बदल सकता है, और उस भाव पर KP का निर्णय बदल सकता है। इसी कारण KP ज्योतिषी सबसे सटीक उपलब्ध जन्म समय मांगते हैं, और cusp sub lord पर भरोसा करने से पहले अक्सर ruling planets से जन्म समय का शोधन करते हैं। इस विषय पर विस्तार से हमारा लेख पढ़ें: जन्म समय की सटीकता लग्न, दशा और sub lord पर कैसे असर डालती है।
जब कोई मुख्य cusp किसी sub सीमा से कुछ कला के भीतर हो, तो उसके sub lord को संवेदनशील मानें और उसकी पुष्टि करें। जहां भरोसेमंद जन्म समय है ही नहीं, वहां KP KP प्रश्न (horary) का रास्ता देता है, जो जन्म कुंडली के बजाय 1 से 249 के बीच की एक संख्या और प्रश्न के समय से काम करता है।
KP अयनांश और Placidus cusps: सेटिंग क्यों मायने रखती है
हर KP sub lord के नीचे दो सेटिंग होती हैं।
अयनांश। KP लाहिड़ी नहीं, बल्कि कृष्णमूर्ति अयनांश का प्रयोग करता है। दोनों में केवल कुछ कला का अंतर है, जिससे राशि या नक्षत्र लगभग कभी नहीं बदलते। लेकिन जब sub केवल 40 कला जितने संकरे हों, तो sub सीमा के पास बैठा cusp या ग्रह दोनों मानों में अलग sub में जा सकता है। कृष्णमूर्ति जी के नियम और प्रकाशित उदाहरण उनके अपने अयनांश पर बने थे, इसलिए KP ज्योतिषी इसे पद्धति का हिस्सा मानते हैं। किसी भी तारीख के मानों की तुलना आप KP अयनांश कैलकुलेटर पर कर सकते हैं।
भाव पद्धति। KP में Placidus cusps लिए जाते हैं, जो एक असमान भाव पद्धति है और जिसमें हर भाव अपने गणना किए गए अंश से शुरू होता है। Cusp sub lord का अर्थ तभी है जब cusp एक सटीक अंश हो। राशि भाव या समान भाव पद्धति cusps के अलग अंश देती है, और इसलिए ऐसे cusp sub lord देती है जो किसी असली KP चार्ट का वर्णन नहीं करते।
AjmerAstro अपने सभी KP टूल्स में इन्हीं सेटिंग का पालन करता है। हर चार्ट AjmerAstro के अपने कैलकुलेशन इंजन से बनता है, और AI केवल वही समझाता है जो गणना में निकला है। KP टूल्स Placidus cusps के साथ KP (कृष्णमूर्ति) अयनांश का प्रयोग करते हैं। KP चार्ट, KP sub lord कैलकुलेटर, KP significators कैलकुलेटर, ruling planets now, KP प्रश्न और 249 sub lords तालिका मुफ्त हैं, और ये सभी अंग्रेज़ी व हिंदी दोनों में उपलब्ध हैं। अगर आप अपने cusp sub lords की रीडिंग चाहते हैं, तो संपर्क पेज से संस्थापक के साथ परामर्श बुक कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: KP ज्योतिष में sub lord क्या होता है?
यह उन नौ असमान भागों में से किसी एक का स्वामी है, जिनमें KP हर नक्षत्र को बांटता है। इन भागों का आकार हर ग्रह की विंशोत्तरी दशा के वर्षों के अनुपात में होता है, इसलिए राशिचक्र के हर अंश का एक राशि स्वामी, एक star lord और एक sub lord होता है।
प्रश्न: Sub lord 243 नहीं, 249 क्यों हैं?
27 नक्षत्रों में नौ-नौ sub से 243 बनते हैं। छह जगहों पर कोई sub राशि की सीमा पार करता है, जिससे उसका राशि स्वामी बीच में बदल जाता है। ऐसे छह sub हर राशि के लिए अलग-अलग गिने जाते हैं, जिससे छह प्रविष्टियां बढ़कर कुल 249 हो जाती हैं।
प्रश्न: Star lord और sub lord में क्या अंतर है?
मानक KP में star lord फल की प्रकृति बताता है, यानी ग्रह किन भावों के विषय सामने लाएगा। Sub lord तय करता है कि वह फल असल में साकार होगा या नहीं, और वह अनुकूल होगा या प्रतिकूल।
प्रश्न: Cusp sub lord क्या है?
यह उस सटीक अंश का sub lord है जहां कोई भाव शुरू होता है। KP इसे उस भाव का न्यायाधीश मानता है: अगर यह सहायक भावों को दर्शाए तो विषय वादा किया हुआ माना जाता है, और अगर विरोधी भावों को दर्शाए तो KP देरी, इनकार या कठिनाई पढ़ता है।
प्रश्न: KP sub lord के लिए जन्म समय कितना सटीक होना चाहिए?
जितना हो सके उतना सटीक। लग्न सबसे संकरे sub को औसतन तीन मिनट से कम में पार कर लेता है, इसलिए कुछ मिनट की गलती भी cusp sub lord बदल सकती है।
प्रश्न: क्या मैं लाहिड़ी अयनांश से KP sub lord निकाल सकता हूं?
इसकी सलाह नहीं दी जाती। KP के नियम Placidus cusps के साथ कृष्णमूर्ति अयनांश पर बने हैं। लाहिड़ी में केवल कुछ कला का अंतर है, पर sub सीमा के पास बैठे cusp या ग्रह का sub lord बदलने के लिए इतना काफी है।
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